Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अनुद्विग्नप्रबोधोऽसौ सर्गादौ चित्तदेहकः ।
आकाशत्मा महान्भूत्वा वेत्ति प्रकृततां ततः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका कर्मानुसारी
प्रबोध उद्रेग से विपर्यस्त नहीं हुआ ऐसा चित्तशरीर सर्ग के आदि में आकाशादि क्रम से महान्
(ब्रह्माण्डात्मा) होकर तदुपरान्त प्रारब्ध कर्मानुसारिणी प्रवृत्ति को जानता है