Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 39, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 39, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
आकाशभूधरनिकुञ्जगुहान्तरालपिण्डोपमण्डिततमोम्बुदपीठपूरम् ।
व्यालोलभूतरभसाकुलकल्पवातव्याधूतलोककरकाण्डकपेटकल्पम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर आकाश,
पर्वतों के निकुज ओर गुफाओं के मध्य में पिण्ड के समान घने तमोरूप मेघो का समूह था |
चंचल प्राणियों के वेग से आकुल अतएव प्रलयकाल के वायु से लोक, लोकोमें रहनेवाले जल
ओर उनके उपकरण जिसमें कँपाये गये हैं, ऐसे ब्रह्माण्डों के तुल्य वह रणांगण था