Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 39, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 39, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
कबन्धकन्धराबन्धव्यग्रवेतालबालकम् ।
यक्षरक्षःपिशाचादिकचदाकाशगोल्मुकम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर वेतालो के बालक कबन्धो के कटे हुए कन्धों में क्रीडा-व्यग्र थे । यक्ष, राक्षस, पिशाच
आदि के आकाश में उड रहे उल्मुक (अर्धदग्ध काष्ठ) दीप्त हो रहे थे