Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 32, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 32, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
तरत्तरलभापूरसपक्षसकलायुधम् ।
धमद्धमितिशब्दैश्च श्वासोस्थैर्ध्मातखान्तरम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में तैर रहीं चंचल प्रकाशराशियों से सकल
शस्त्र-अस्त्र पूछ से युक्त से हो रहे थे, दुन्दुभी आदि के "धम्, धम्“ शब्दोंसे और मुखवायु से
होनेवाले शंख आदि के शब्दों से दोनों सेनाओं का आकाशमण्डल शब्दायमान था