Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 32
3 verse-groups
- Verses 1–19का आवास होने के कारण दूसरे आकाश की नाई किसी विशाल वन में दो महासागरं के तुल्य परस्पर सब प…
- Verse 20आकाश में तैर रहीं चंचल प्रकाशराशियों से सकल शस्त्र-अस्त्र पूछ से युक्त से हो रहे थे, दुन्…
- Verses 21–28अब दोनों सेनाओं के प्रवेशमार्ग के भेद से विभिन्न व्यूहस्वना का वर्णन करते हैं। कहीं पर च…