Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 30, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 30, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

अस्वातन्त्र्यात्प्रधावन्ति पदार्थाः सर्व एव यत् । ब्रह्माण्डे पार्थिवो भागस्तदधस्तूर्ध्वमन्यथा ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा सब वस्तु ईश्वरेच्छाधीन हैं, इसलिए पूर्वोक्त नियम का उल्लंघन दोषदायक नहीं है, इस अभिप्राय से श्रीवसिष्ठजी कहते है । अस्वतन्त्र होने के कारण सभी पदार्थ वेग से इधर- उधर भाग रहे हैं। उनमें परस्पर आकर्षण होने के कारण वे गिरते नहीं है । भाव यह है कि जैसे कदम्ब के फूल के केसरों की आधारभूत जो कर्णिका है, उसकी अपेक्षा से ही उनके यूलदेश की कल्पना होती है, वैसे ही ब्रह्माण्डों में जितने पदार्थ हैं, उन सबकी पृथिवी मूलदेश मानी जाती है । यहाँ पर ऐसी शंका नहीं करनी चाहिए कि वास्तविक अधो देश का अस्तित्व न होने से फल की डंठी से गिरे हुए फल के गुरू (वजनदार) होने से नीचे गिरने में कोड हेतु नहीं होगा । क्योकि गुरुत्व विषयो का कोई अन्य गुण नहीं है, जैसे विषयों में अपनी-अपनी इन्द्रिय की आकर्षण शक्ति ही युरुत्व है। अतएव बाह्य दिगृविभाग न होने के कारण अत्यन्त गुरुतम ब्रह्माण्ड नहीं गिरते हैं और न उनके आवरण भूत जल आदिसे उनका विश्लेषण ही होता है । इसलिए अधिष्ठान चैतन्य में दिय्‌ विभाग की आवश्यकता ही नहीं है, इस आशय से दूसरा समाधान करते हैं । ब्रह्माण्ड में महापृथिवीरूप जो ब्रह्माण्ड का भाग है वह सम्पूर्ण भौतिक पदार्थों के नीचे है और उससे अन्य आकाश भाग ऊपर है, ऐसी कल्पना है