Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, Verses 9–10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, verses 9–10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 9,10
संस्कृत श्लोक
सर्वासां भूतजातीनामेकोऽजः कारणं परम् ।
अजस्य कारणं नास्ति तेनासावेकदेहवान् ॥ ९ ॥
नास्त्येव भौतिको देहः प्रथमस्य प्रजापतेः ।
आकाशात्मा च भात्येष आतिवाहिकदेहवान् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
इसी बात को दूसरे प्रकार से कहते हैं।
एक अज (हिरण्यगर्भ) सम्पूर्ण भूतों का परम कारण है । उसका कोई कारण नहीं है, इससे
वह आतिवाहिकरूप एक देहवाला है, आतिवाहिक और आधिभौतिकरूप दो देहोंवाला नहीं
है। प्रथम प्रजापति (ब्रह्मा) का भौतिक शरीर नहीं है । भौतिक शरीर न होने से इसका केवल
आतिवाहिक ही शरीर है, अत: वह केवल चिदाकाशस्वरूप है, कारण कि आरोपित पदार्थ का
५ अतिवहन में-अर्चिरादि तथा धूमादि मार्ग से अन्य लोक में पहुँचाने में दक्ष हम लोगों के लिंग
शरीर के सदृश, शरीर आतिवाहिक है ।
अधिष्ठान से अतिरिक्त स्वरूप नहीं होता