Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
सर्वेषामेव देहौ द्वौ भूतानां कारणात्मनाम् ।
अजस्य कारणाभावादेक एवातिवाहिकः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे
श्रीरामचन्द्रजी, कारणयुक्त (पंचीकृत भूतों से उत्पन्न देह आदि से युक्त) सभी प्राणियों के
आतिवाहिक और आधिभौतिक ये दो शरीर हैं, कारण न होने से (पंचीकृतभूतरूप कारण न
होने से) अजन्मा हिरण्यगर्भ का केवल एक आतिवाहिक ही शरीर है