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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 28, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 28, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । वज्राङ्गसाराद्ब्रह्माण्डकुड्यान्निबिडमण्डलात् । कोटियोजनसंपुष्टात्कथं ते निर्गतेऽबले ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, वज के समान दृढ पूर्वोक्त रीति से अनेक करोड़ योजन भलीभाँति पुष्ट मध्यभागवाले अत्यन्त निबिड ब्रह्माण्ड की दीवार से वे अबलाएँ कैसे निकली । भाव यह कि स्वप्न में मिथ्याभूत दीवार भी गमन की प्रतिरोधक देखी गई है, अतः उस प्रकार की दृढ़ और घन दीवार से निकलना असंभव प्रतीत होता है

सर्ग सन्दर्भ

सत्ताईसवाँ सर्ग समाप्त अड्ठाईसवाँ सर्ग दृष्ट प्रपंच के असत्य होने से चिदाकाश की सत्यता और पर्वत तथा गिरिग्राम का विस्तार से वर्णन।