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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

आसन्नमृत्युकरुणाकुलवक्त्रकान्तिसंशीर्णजीर्णतरुपर्णवनोपमानम् । वृष्टिव्यपायपरिधूसरदेशरूक्षं जातं गृहेश्वरवियोगहतं गृहं तत् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

वह घर गृहपति के वियोग से हतप्रभ हो गया था, उसकी मुखकान्ति करुणा से (शोक को बढानेवाले एक प्रकार के भाव से) फीकी पड गई थी, अतएव वह आसन्न मृत्युवाले पुरुष की नाई दिखाई देता था । वह चिरकाल की अनावृष्टि से धूलिधूसर देश की नाई रूखा था और था उस बन के समान विरुप जिसके वृक्षों के पुराने सब पत्ते झड़ गये हों