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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । तयास्य लीलया मात्रा पुत्रस्य ज्येष्ठशर्मणः । कस्मान्न दर्शनं दत्तं मोहं तावन्निराकुरु ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी को यह शंका हुई कि लीला तो सत्यसंकल्प थी, अतएव उसने पहले के (ब्राह्मण और बराह्मणी के जन्म के) माता के शरीर से ही पुत्र के आश्वासन के लिए दर्शन क्यो नहीं दिया ? उसी शंका को वे व्यक्त करते हैं । श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, लीलादेवी ने पुत्र ज्येष्ठशर्मा को माता के शरीर से दर्शन क्यों नहीं दिया ? इस विषय में मेरे मोह का (अज्ञान का) आप निराकरण कीजिये