Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, Verses 21–22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, verses 21–22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 21, 22
संस्कृत श्लोक
इति तद्वचनान्ते ते देव्यावूचतुरादरात् ।
आख्यात दुःखं येनायं लक्ष्यते दुःखितो जनः ॥ २१ ॥
ज्येष्ठशर्मादयस्ते ते देव्यौ प्रति यथाक्रमम् ।
निजं तद्दुःखमाचख्युर्दम्पतिव्यसनात्मकम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्येष्ठशर्मा के यह कहने के बाद उन वन-देवियों ने बड़े आदर से पूछा आप लोग अपना दुःख
किये, जिस दुःख से ये सभी लोग दुःखी दिखाई देते हैं। उन ज्येष्ठशर्मा आदि सबने क्रमशः
उक्त वन-देवियों से ब्राह्मणदम्पतियों का मरणरूप दुःख कहा