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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

ज्येष्ठशर्मादय ऊचुः । जयतं वनदेव्यौ नो दुःखनाशार्थमागते । प्रायः परपरित्राणमेव कर्म निजं सताम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

ज्येष्ठशर्मा आदि ने कहा : हे वन-देवियों, आप लोगों की जय हो, मालूम होता है कि आप दोनों हमारे दुःख को निवृत्त करने के लिए आई हैं, क्योंकि प्राय: दूसरों की रक्षा करना ही सत्पुरुषों का स्वभाव है