Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 22, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 22, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
या सुप्तवासना निद्रा सा सुषुप्तिरिति स्मृता ।
यत्सुप्तवासनं जाग्रद्धनोऽसौ मोह उच्यते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
मूर्छा ओर सुषुप्ति में अवान्तर भेद दशतीि हैं ।
जिस निद्रा में वासनाओं का उद्भव न हो या तिरोभाव हो जाय, उसका नाम सुषुप्ति है,
जिस जागरण में वासनाओं का आविर्भाव न हो या तिरोभाव हो जाय, उसको घन मोह (मूर्छा)
कहते हैं । भाव यह कि अनुद्भुतवासना निद्रा सुषुप्ति है ओर आविर्भूतवासना जागरण मोह
यानी मूर्छा है