Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
अयं प्रपञ्चो मिथ्यैव सत्यं ब्रह्माहमद्वयम् ।
अत्र प्रमाणं वेदान्ता गुरवोऽनुभवस्तथा ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ में प्रमाणो की असंभावना का मूलोच्छेद करने के लिए दढतर प्रमाणों को
दिखलाते हैं ।
यह सम्पूर्ण प्रपंच झूठा है और ब्रह्म सत्य है, अद्वितीय आत्मरूप । इस विषय में
उपनिषत् वाक्य, गुरुजन और अपना अनुभव प्रमाण है