Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मैव पश्यति ब्रह्म नाब्रह्म ब्रह्म पश्यति ।
सर्गादिनाम्ना प्रथितः स्वभावोऽस्यैव चेदृशः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्म ही ब्रह्म को देखता है
ब्रह्म से भिन्न कदापि ब्रह्म को नहीं देख सकता, ब्रह्म की ही इस प्रकार की यह आवृत-
सत्ता सृष्टि के नाम से लोक में प्रसिद्ध हुई है