Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
एवं न किंचिदुत्पन्नं दृश्यं चिज्जगदाद्यपि ।
चिदाकाशे चिदाकाशं केवलस्वात्मनि स्थितम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार प्रपंचाभाव अक्षुण्ण स्थित है, यों उपसंहार करती है ।
इस तरह कुछ भी उत्पन्न नहीं हुआ है, जो कुछ जगत् आदि दुश्यरूप से प्रतीत होता है,
यह भी चित् ही हे । केवल चिदाकाश स्वात्मभूत चिदाकाश में स्थित है, क्योंकि स्वे महिम्नि
स्थितः" (अपने स्वरूप में स्थित है) ऐसी (०३) श्रुति है