Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 17, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 17, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्निरस्तनिःशेषसंकल्पा स्थितिमेषि चेत् ।
सर्वात्मकं पदं तत्त्वं त्वं तदाप्नोष्यसंशयम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः तुम्हारी चिदाकाश की प्राप्ति ही चिदाकाशरूप से स्थित पति के समीप में गमन है,
क्योकी उसीमें तुम्हारे पति का परलोक कल्पित है, इस अभिप्राय से देवी कहती हैं।
२. विस्तृत व्याख्यान उ.प्र. सर्ग २९ मेँ देखिये ।
भद्रे, यदि तुम सम्पूर्ण संकल्पो का परित्याग कर उक्त चिदाकाश में ही मनको एकाग्र
करती हो, तो तुम सर्वात्मक उस प्राप्तव्य तत्वको अवश्य प्राप्त हो जाओगी