Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 17, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 17, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
देशाद्देशान्तरप्राप्तौ संविदो मध्यमेव यत् ।
निमिषेण चिदाकाशं तद्विद्धि वरवर्णिनि ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
देवी उसके लिए चिदाकाशका परिचय कराती है।
हे सुभगे, संवित् के एक पलक में एक देश से दूसरे देश को प्राप्त होने पर संवित् का जो
मध्य है, उसीको तुम चिदाकाश जानो (२७)