Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
समुद्रेऽन्तर्जलस्पन्दाः स्वभावादच्युता अपि ।
वीचिवेगा भवन्तीव परे दृश्यविदस्तथा ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे समुद्र में जल का स्पन्द (स्फुरण) जलस्वभाव से च्युत हुए बिना ही
लहर-सा प्रतीत होता है, वैसे ही चिन्मय ब्रह्म में भ्रमवश जगत् की प्रतीति होती है