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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अभूदस्मिन्महीपीठे कुलपद्मो विकाशवान् । पद्मो नाम नृपः श्रीमान्बहुपुत्रो विवेकवान् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामजी, प्राचीन काल में इस भूतल में पद्म नामका राजा हुआ । वह राजा था इसलिए लक्ष्मी की उसके पास कोई कमी न थी, उसके पुत्र भी बहुत थे और वह विवेकी भी था । जैसे खिला हुआ कमल तालाब को सुगन्धित करता है और उसकी शोभा बढ़ाता है, वैसे ही वह भी अपने कुल की कीर्ति रूपी सुगन्धि और सुन्दरता का हेतु होने से कुल रूपी सरोवर का प्रफुल्ल कमल था