Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
सद्बोधवृद्धये ब्रह्मन्समासेन वदाशु मे ।
मण्डपाख्यानमखिलं येन बोधो विवर्धते ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्, सत्-चिदानन्दमय ब्रह्म के बोध की सिद्धि के लिए सम्पूर्ण
मण्डपाख्यान संक्षेप से शीघ्र मुझसे कहिये, जो कि बोध की वृद्धि करता है