Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 80
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, verse 80 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 80
संस्कृत श्लोक
धत्तेऽन्तरखिलं शान्तं संनिवेशं यथा शिला ।
पदार्थनिकराकाशे त्वयमाकाशजो मलः ॥ ८० ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण प्रपच शान्त कैसे है, इस पर कहते हैं ।
सम्पूर्ण पदार्थो के अधिष्ठानभूत चिदाकाश में यह भूताकाशजनित वायु आदि सम्पूर्ण
प्रपंच प्रतीत होता है जब असंगस्वभाववाले भूताकाश में ही उसके कार्य वायु आदि का
सम्बन्ध नहीं हे, तब चिदाकाश में इस प्रपच के सत्ता, असत्ता, त्वत्ता, मत्ता आदि सम्बन्ध
कैसे होंगे कदापि नहीं हो सकते