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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 79

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, verse 79 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 79

संस्कृत श्लोक

चिदेकत्वात्प्रसङ्गः स्यात्कस्तत्रेतरविभ्रमः । शिलाहृदयपीनापि स्वाकाशे विशदैव चित् ॥ ७९ ॥

हिन्दी अर्थ

शिला के (पत्थर के) हृदय के (मध्य के) समान अत्यन्त निबिड (ठोस) होती हुई भी चिति स्फटिक आदि के समान स्वच्छ ही हे । अतएव जैसे स्फटिक शिला अपने अन्दर प्रतिबिम्बित नगर, पर्वत आदि के आकार को धारण करती हे, वैसे ही वह भी शान्त (मिथ्या होने के कारण असद्रूप ) सम्पूर्णं प्रपंच को चिदाकाशरूप अपने स्वरूप में धारण करती है