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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 48

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

चिता यथादौ कलिता स्वसत्ता सा तथोदिता । अभिन्ना दृश्यते व्योम्नः सत्तासत्ते न विद्महे ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञान से दृश्य और दुश्य की सत्ता का नाश होने पर पूर्वसिद्ध जो अधिष्ठानसत्ता है, वह ज्यो-की-त्यो उदित होती है, जैसे कि मेघो के हट जाने पर निर्मल आकाशसत्ता उदित होती है, ऐसा कहते हैं। जैसे चित्‌ ने पहले अपनी जैसी सत्ता का ग्रहण किया था, वही सर्वाधिष्ठानसत्ता ज्ञान होने पर ज्यों-की-त्यों उदित होती है, जैसे कि मेघों के हट जाने पर पूर्वसिद्ध आकाश की निर्मल सत्ता उदित होती है। सत्‌ और असत्‌ इस प्रकार के सत्ता भेद को हम नहीं जानते