Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 13, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 13, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
स्मृतिर्न प्राक्तनी काचित्कारणं वा स्वयंभुवः ।
तेन यादृक्स्वयंभूः स्यात्तादृक्तज्जमिदं स्मृतम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
तब जगत् को अद्वृष्ट संस्कार आदि सामग्रीसे उत्पन्न हुआ क्यों न माना जाय ? इस शंका
पर कहते हैं।
महाकल्प के अन्त में ब्रह्मा (हिरण्यगर्भ) आदि मुक्त हो जाते हैं, इसमें तो कोई सन्देह ही
नहीं है, इसलिए वर्तमान जन्म में ब्रह्मा की पूर्व जन्म की स्मृति तो जगत् की उत्पत्ति में कारण
हो नहीं सकती