Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verses 40–41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verses 40–41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
अदेहो देहजैरेभिर्लज्जादिभिरसन्मयैः ।
किं मूर्ख इव दुर्बुद्धिर्विकल्पैरभिभूयसे ॥ ४० ॥
अखण्डचितिरूपस्य देहे खण्डनमागते ।
असम्यग्दर्शिनोऽप्यस्ति न नाशः किमु सन्मतेः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दुर्बुद्धि मूर्ख पुरुष विकल्पों से
अभिभूत होता है, वैसे ही देहरहित आप देह से उत्पन्न होनेवाले असत्स्वरूप इन लज्जा
आदि से कैसे अभिभूत होते हैं ?