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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

संसारोग्रारघट्टेऽस्मिन्नारूढा यन्त्रवाहिनी । रज्जुस्तां वासनामेतां छिन्धि राघव यत्नतः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

संसाररूपी विशाल चाक के बीच में स्थित कील पर आरूढ़ तिरछे काट में लगी हुई, ऊपर और नीचे के चाक को वहन करनेवाली रज्जुरूपी यह वासना है, हे श्रीरामचन्द्रजी आप प्रयत्नपूर्वक इस वासना का नाश कीजिये। इस संसाररूपी चक्की में पृथिवी नीचे का चाक है, मेरू पर्वत उसकी कील है और ज्योतिर्मण्डल ऊपर का चाक है ओर यह जगत्‌ वासना से बँधा हुआ है