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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

मनःप्रशमने सिद्धे वासनाक्षयनामनि । कर्मक्षयाभिधानैव मायेयं प्रविनश्यति ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

चूँकि यह चित्त से उत्पन्न हुई है, इसलिए चित्त के क्षय से ही इसका क्षय होता है, ऐसा कहते हैं। वासनाक्षयनामक मन:प्रशमन के सिद्ध होने पर कर्मो की (क्रियाशक्तियों की) निवासभूत यह माया नष्ट हो जाती है