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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

श्रव्यं स्पृश्यं तथा दृश्यं रस्यं घ्रेयं च राघव । न किंचिदस्ति जगति व्यतिरिक्तं यदात्मनः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, इस जगत्‌ में सर्वशक्ति परमात्मा में ही ये सब शक्तियाँ स्थित हे । ऐसी कोई सुनने योग्य, छूने योग्य, देखने योग्य, श्वास लेने योग्य, सूँघने योग्य दूसरी वस्तु नहीं हे, जो आत्मा से भिन्न हो