Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
परमार्थमयं सर्वं यथा तेनोपलादयः ।
चिता समभिचेत्यन्ते संबन्धवशतः समाः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि सब पदार्थ चिन्मय ही मान लिये जायें तो चिद्रूप से तुल्य सव पदार्थों के साथ चित् का
सम्बन्ध उत्पन्न है, यह कहते है ।
चूँकि सब पदार्थमय हैं, इसलिए पाषाण आदि पदार्थ चित् के समान हैं चित् के साथ
सम्बन्धवश वे चित् से प्रकाशित होते हैं