Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 17

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

न तानि कामस्य विलासिनीह मुखेऽपि शोभालसितानि सन्ति । तमालनीले चिबुकैकदेशे सुतस्य चान्यास्यगतामिषस्य ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस समय अपनी लड़की के ऊपर मोहित हुए उसकी मुखशोभा का स्मरण कर वर्णन करती है। आसवपान आदि के समय अपनी परम प्रिया के मुख से बड़ी प्रीति के साथ जिसे मांस का टुकड़ा प्राप्त हुआ था, ऐसे मेरे दुलारे बेटेरूप (जमाता)तुम्हारे उस मांस के ढुकड़े को चबाते समय तमाल के सदुश काली दाढी से नीले चिबूक के (ठोड़ी के) एक भाग में जो शोभा से सने हुए विलास हुए, वे इस सारे जगत्‌ में विलास करनेवाले कामदेव के सारे मुँह में नहीं हो सकते हैं