Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
कदम्बजम्बीरलवङ्गगुञ्जाकुञ्जान्तरतस्तु चरत्तरक्षोः ।
पश्यामि पुत्रस्य कदा नु भूयो भयंकराण्युड्यतिवल्गितानि ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
कदम्ब ओर जम्बीर के पेड़ों तथा लौंग
ओर गुंजा की लताओं के निकुजों के (झाड़ियों के) भीतर छिरकर चल रहे बाघ को भी भय
में डालनेवाले अपने पुत्र के (जमाई के) बाघ को मारने के लिए छलाँग मारकर चलने को
फिर मैं कब देखूँगी