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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

अहंतोदेति तदनु सह वै कालसत्तया । भविष्यदभिधार्थेन बीजं मुख्यजगत्स्थितेः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्वोक्त हिरण्यगर्भरूप जीव के अहन्ताभिमान की और तवसे लेकर द्विपरार्द्धपरिमित ब्रह्मा की आयुरूप कालकी सृष्टि को कहते हैं । आकाशसत्ता के अनन्तर भावी (होनेवाले) नामों के अर्थरूप से जगत्स्थिति की मुख्य बीजभूत अहन्ता (अहंकार) कालसत्ता के साथ उदित होती है