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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 37

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

मुकुरप्रतिबिम्बस्थे नगरे नवयोजने । यथा दूरमदूरं च तथेशे तदतत्क्रमः ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

दर्पण में प्रतिबिम्बरूप से स्थित नौ योजनवाले दीर्घ नगर में जैसे दूरता ओर समीपता दोनों हैं, वैसे ही ईश्वर मेँ दूरता ओर समीपता का क्रम है