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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

असदभ्युदितं विश्वं सदप्यभ्युदितं सदा । प्रतिभासात्सदाभासमवस्तुत्वादसन्मयम् ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार सत्‌ का ही असत्‌ विश्व के आकार से भान होनेसे तत््वदुष्टि से सत्‌ ही उदित हुआ है ओर अतत्त्व दृष्टि से असत्‌ ही उदित हुआ है, क्योकि अभेद का भान होने से वह सत्‌ की तरह प्रतीत होता है और भेद का दर्शन होने पर वह अवस्तु होने से असन्मय हो जाता है