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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

सद्वा भवत्वसद्वापि सुरूढं हृदये हि यत् । तत्तदर्थक्रियाकारि विषस्येवामृतक्रिया ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

सद्वस्तु हो चाहे असद्रस्तु हो, जो हृदय में सुदृढरूप से जम गई, वही अर्थक्रियाकारी होती है । जैसे कि यह अमृत है, इस प्रकार विश्वास होने पर विषसे भी अमृतकार्य होते हैं