Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verses 13–14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, verses 13–14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 13 ,14
संस्कृत श्लोक
हेमतां वर्जयित्वैकां विद्यते हेम्नि नेतरत् ।
ऊर्मिकाकटकादित्वं तैलादिसिकतास्विव ॥ १३ ॥
नेहास्ति सत्यं नो मिथ्या यद्यथा प्रतिभाव्यते ।
तत्तथार्थक्रियाकारि बालयक्षविकारवत् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बालू में तेल आदि नहीं हे वैसे ही सुवर्णं में केवल सुवर्णता को छोड़कर अन्य अंगूठीयकत्व,
कटकत्व आदि नहीं हे । यहाँ पर न तो कुछ सत्य है और न मिथ्या है यानी सत्य ही अर्थक्रियाकारी
है अथवा मिथ्या ही अर्थक्रियाकारी है, यह कोई नियम नहीं है । जो वस्तु अधिष्ठानसत्ता में
जैसे प्रतिभासित होती है वैसे ही वह अर्थक्रियाकारी होती है जैसे कि बालक को असत् यक्ष
के दर्शन आदि से विकार आदि होते हैं