Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 118 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
भूमिकापञ्चकाभ्यासात्स्वात्मारामतया दृढम् ।
आभ्यन्तराणां बाह्यानां पदार्थानामभावनात् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी भूमिका के अत्यन्त परिपाक से आगे की दो भ्रूमिकाएँ होती है, इस आशय से
कहते हैं ।
पाँच भूमिकाओं के अभ्यास से आत्मारामरूप से दृढ़ स्थिति होती है। बाह्य ओर आभ्यन्तर
पदार्थों की भावना न होने से यह भूमिका पदार्थाभावनी कहलाती है