Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 118 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इमां सप्तपदां ज्ञानभूमिमाकर्णयानघ ।
नानया ज्ञातया भूयो मोहपङ्के निमज्जसि ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे निष्पाप श्रीरामचन्द्रजी, सात प्रकार की इस ज्ञानभूमिका को
आप सुनिये । अभ्यास क्रमसे अनुभव में आई हुई इस ज्ञानभूमिका से फिर आप अज्ञानरूपी
कीचड़ में नहीं फँसेंगे
सर्ग सन्दर्भ
एक सौ सत्रहवाँ सर्ग समाप्त एक सौ अट्टारहवाँ सर्ग मोक्षपर्यन्त सात प्रकार की ज्ञानभूमिका का अपने-अपने लक्षणों के साथ भलीभाँति वर्णन ।