Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 118 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
वदन्ति बहुभेदेन वादिनो योगभूमिकाः ।
मम त्वभिमता नूनमिमा एव शुभप्रदाः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि योगशास्त्र मे यम, नियम आदि आठ अगो के भेदो से थिन्न जो
योगशभूमिकाएँ प्रसिद्ध है क्या वे ही तो ये नहीं है 2 इस पर कहते हैं, वे ये नहीं हैं ।
योग-सांख्यवादी बहुत भेदों से युक्त योगभूमिकाओं को कहते हैं, उन योग भूमिकाओं
का फल तुच्छ सिद्धि है । वे औरों को अभीष्ट हैं । मुझे तो ये ज्ञानभूमिकाएँ ही अभीष्ट है,
क्योंकि ये परम पुरुषार्थरूप कल्याण देनेवाली हैं