Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 117, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 117, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 117 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अज्ञानभूमिरिति सप्तपदा मयोक्ता नानाविकारजगदन्तरभेदहीना ।
अस्याः समुत्तरसि चारुविचारणाभिर्दृष्टे प्रबोधविमले स्वयमात्मनोति ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
यों वर्णित अज्ञानभूमिका का उपसंहार कर रहे श्रीवसिष्ठजी उससे उतरने का उपाय
कहते हैं।
इस प्रकार सात प्रकार की अज्ञानभूमिका का मैंने वर्णन किया । यह अज्ञानभूमिका विविध
विकारों से तथा अन्यान्य जगतों के भेदों से अवश्य त्याज्य है । पूर्व में कही गई एवं आगे कही
जानेवाली सुन्दर विचारणाओं से प्रत्यंगमात्र एकरस आत्मा का दर्शन होने पर इस अविद्याभूमिका
से आप अवश्य बाहर निकल जायेंगे