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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 116 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

इत्थमनन्ता ब्रह्मकोटयोऽस्मिन्ब्रह्माण्डेऽन्येषु च समतीता भविष्यन्तीति सन्ति चेतरा अनन्ता यासां संख्यापि न विद्यते ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार अन्य हिरण्यगर्भो के मन में भी नश्वरता प्रमाणसिद्ध है, ऐसा कहते है । इस ब्रह्माण्ड में भी प्रत्येक परमाणु में करोड़ों ब्रह्माण्डों की कल्पना है, इसलिए अनन्त ब्रह्माण्डकोटिर्यौ और अन्य ब्रह्मण्डों मेँ भ व्यतीत हो गई होगी ओर हैं, जिनकी संख्या नहीं हे