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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

यथोदिते दिनकरे क्वापि याति तमस्विनी । तथा विवेकेऽभ्युदिते क्वाप्यविद्या विलीयते ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सूर्य भगवान्‌ का उदय होने पर अंधेरी रात न मालूम कहाँ चली जाती है वैसे ही विवेक के उदित होने पर अविद्या न मालूम कहाँ छिप जाती है ?