Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
दृढवासनया बन्धो घनतामेति चेतसः ।
बलाद्वेतालसंकल्पः संध्याकाले यथा शिशोः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वेताल की दृढतर वासना से वासित बालक का सन्ध्या के समय
वेतालसंकल्प अपने-आप हठात् बढ़ने लगता है, वैसे ही अपनी दुढतर विषयवासना से चित्त
का बन्धन मजबूत होता जाता है