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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

मनागपि मनोव्योम्नि वासनारजनीक्षये । कालिमा तनुतामेति चिदादित्यमहोदयात् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

मनरूपी आकाश में शुद्ध चैतन्यरूपी सूर्य का उदय होनेसे कामवासना रूपी रात्रि के थोड़ा बहुत क्षीण होने पर अविद्यारूपी आवरण क्षीण हो जाता है