Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
यावत्किंचिदिदं दृश्यं साविद्या क्षीयते च सा ।
आत्मभावनया ब्रह्मन्नात्मासौ कीदृशः स्मृतः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, जो कुछ भी यह
दृश्य वस्तुसंघात है, वह अविद्या है ओर वह अविद्या आत्मचिन्तन से नष्ट हो जाती है, कृपया
बतलाइये वह आत्मा कैसा है २