Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
चेत्यानुपातरहितं सामान्येन च सर्वगम् ।
यच्चित्तत्त्वमनाख्येयं स आत्मा परमेश्वरः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्री वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, विषयों के
संसर्ग से रहित, सामान्य (५४5) से रहित अर्थात् विक्षेप ओर आवरण से रहित तथा जिसका
वाणी द्वारा वर्णन नहीं हो सकता, ऐसा जो चित्- तत्त्व है, वह परमेश्वर आत्मा है