Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
नासि कर्ता किमेतासु क्रियासु ममता तव ।
एकस्मिन्विद्यमाने हि किं केन क्रियते कथम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
बन्धन की जड़ कर्तुत्वाभिमान है, इसलिए पहले उसी का त्याग कीजिये, ऐसा कहते हैं ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप कर्ता नहीं है, फिर आपकी इन क्रियाओं में ममता क्यों हैं जब
एक अद्वितीय ब्रह्म के सिवा दूसरा कोई हे ही नहीं, तो कौन किसको किससे ओर कैसे करे ?
भाव यह कि केवल एकमात्र से साध्य कोई क्रिया प्रसिद्ध नहीं हे