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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

स्वविकल्पादृते नैतान्भावाभावानसन्मयान् । नित्येऽसिते तते शुद्धे मा समारोपयात्मनि ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

ये भाव और अभाव पदार्थ असन्मय हैं । अपने संकल्प के सिवा इनका दूसरा रूप नहीं हें । इनका आप देहादिबन्धनों से रहित, सर्वव्यापक, नित्य, शुद्ध ब्रह्म मे आरोप मत कीजिये